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मीराबाई चानू : एक प्रेरक बच्ची की कहानी

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 *मीराबाई चानू की कहानी* उस समय उसकी उम्र 10 साल थी। इम्फाल से 200 किमी दूर नोंगपोक काकचिंग गांव में गरीब परिवार में जन्मी और छह भाई बहनों में सबसे छोटी मीराबाई चानू अपने से चार साल बड़े भाई सैखोम सांतोम्बा मीतेई के साथ पास की पहाड़ी पर लकड़ी बीनने जाती थीं।  एक दिन उसका भाई लकड़ी का गठ्ठर नहीं उठा पाया, लेकिन मीरा ने उसे आसानी से उठा लिया और वह उसे लगभग 2 किमी दूर अपने घर तक ले आई।  शाम को पड़ोस के घर मीराबाई चानू टीवी देखने गई, तो वहां जंगल से उसके गठ्ठर लाने की चर्चा चल पड़ी। उसकी मां बोली, ''बेटी आज यदि हमारे पास बैल गाड़ी होती तो तूझे गठ्ठर उठाकर न लाना पड़ता।'' ''बैलगाड़ी कितने रूपए की आती है माँं ?'' मीराबाई ने पूछा ''इतने पैसों की जितने हम कभी जिंदगीभर देख न पाएंगे।'' ''मगर क्यों नहीं देख पाएंगे, क्या पैसा कमाया नहीं जा सकता ? कोई तो तरीका होगा बैलगाड़ी खरीदने के लिए पैसा कमाने का ?'' चानू ने पूछा तो तब गांव के एक व्यक्ति ने कहा, ''तू तो लड़कों से भी अधिक वजन उठा लेती है, यदि वजन उठाने वाली खिलाड़ी बन जाए त...

JOKES : पत्नी को भगा ले जाने पर पति ने दिया मजेदार जवाब....पढ़ें मजेदार चुटकुले

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 शादी की 5वीं सालगिरह पर पत्नी पति के सीने से लग के बोली - सुनिए जी, अगर मुझे कोई भगा के ले जाए तो आप क्या करेंगे? पति - हट पगली, कैसे सवाल पूछती है पत्नी - बताओ ना जानू... पति - मैं बोलूंगा भाई भगा के क्यों ले जा रहे हो, आराम से ले जाओ, मैं रोक थोड़ी रहा हूं। संता से जानें पत्नी के पापा अगर ससुर हैं तो गर्लफ्रेंड के पापा क्या हुए.... बंता- आपने कभी सोचा है कि पत्नी के पापा को... अगर ससुर कहते हैं, तो गर्लफ्रेंड के पापा को क्या कहेंगे? संता- अगर शादी के लिए हां कर दे, तो ससुर नहीं तो असुर! खाली लव लेटर का सही मतलब सोनू खाली पेपर को बार-बार चूम रहा था। मोनू - ये क्या है? सोनू - लव लेटर है मोनू - मगर ये तो खाली है सोनू - आज कल बातचीत बंद है

"गाय का जूठा गुड़"

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 *"गाय का जूठा  गुड़"* *एक शादी के निमंत्रण पर जाना था, पर मैं जाना नहीं चाहता था।* *एक व्यस्त होने का बहाना और दूसरा गांव की शादी में शामिल होने से बचना..लेक‌िन घर परिवार का दबाव था सो जाना पड़ा।* *उस दिन शादी की सुबह में काम से बचने के लिए सैर करने के बहाने दो- तीन किलोमीटर दूर जा कर मैं गांव को जाने बाली रोड़ पर बैठा हुआ था, हल्की हवा और सुबह का सुहाना मौसम बहुत ही अच्छा लग रहा था , पास के खेतों में कुछ गाय चारा खा रही थी कि तभी वहाँ एक लग्जरी गाड़ी  आकर रूकी,* *और उसमें से एक वृद्ध उतरे,अमीरी उसके लिबास और व्यक्तित्व दोनों बयां कर रहे थे।* *वे एक पॉलीथिन बैग ले कर मुझसे कुछ दूर पर ही एक सीमेंट के चबूतरे पर बैठ गये, पॉलीथिन चबूतरे पर उंडेल दी, उसमे गुड़ भरा हुआ था, अब उन्होने आओ आओ करके पास में ही खड़ी ओर बैठी गायो को बुलाया, सभी गाय पलक झपकते ही उन बुजुर्ग के इर्द गिर्द ठीक ऐसे ही आ गई जैसे कई महीनो बाद बच्चे अपने मांबाप को घेर लेते हैं, कुछ गाय को गुड़ उठाकर खिला रहे थे तो कुछ स्वयम् खा रही थी, वे बड़े प्रेम से उनके सिर पर गले पर हाथ फेर रहे थे।* *कुछ ही देर में गा...

SUCCESS STORY गरिमा अग्रवाल : आईआईटीयन से आईपीएस और फिर आईएएस, जानिए कैसे पाई यूपीएससी में सफलता

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देश में भारतीय प्रशासनिक सेवा विभाग सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। इसमें उम्मीदवार विभिन्न मंत्रालय और विभाग में सचिव स्तरीय पद प्राप्त करते हैं तो वहीं जिलास्तर पर जिलाधिकारी और विभिन्न प्राधिकरणों में आयुक्त पद पर काबिज होते हैं।  यही कारण है कि प्रत्यके वर्ष लाखों युवा संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की ओर से आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा यानी सीएसई में अपनी किस्मत आजमाते हैं। हालांकि, सभी को सफलता नसीब नहीं हो पाती है। लेकिन कुछ होनहार ऐसे भी होते हैं, जो अपने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को क्लीयर कर लेते हैं।  ऐसी ही एक होनहार हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस अधिकारी गरिमा अग्रवाल। मध्यप्रदेश के खरगोन की 29 वर्षीय गरिमा ने यूपीएससी के अपने पहले ही प्रयास में आईपीएस की रैंक पाकर सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ और था। उन्होंने फिर से तैयारी की और दूसरे ही प्रयास में आईएएस बनने का अपना ख्वाब पूरा किया।   आइए जानते हैं आईएएस गरिमा की सफलता की कहानी ...   इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में पैसा, शोहरत, रूतबा और दबदबा सब कुछ ...

मन में आ रहे नकारात्मक विचार भगायें, ये तरीके अपनाएं

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दुनिया में दो तरह के विचार होते हैं, एक सकारात्मक और दूसरे नकारात्मक। ज्यादातर लोगों की शिकायत होती है कि उन्हें नकारात्मक विचार काफी ज्यादा आते हैं।  ऐसे विचार आने से व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों का काम में मन नहीं लग पाता, बनते काम भी बिगड़ने लगते हैं, कुछ अच्छा महसूस नहीं होता है आदि बहुत कुछ व्यक्ति को गलत लगने लगता है।  ऐसे में सवाल ये उठता है कि नकारात्मक विचारों से बचने के लिए क्या किया जाए? तो चलिए हम आपको कुछ तरीके बताते हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं। समस्या को बढ़ाएं नहीं जब कोई समस्या आती है, तो ऐसा नहीं कि वो हमेशा के लिए आपके साथ रहेगी। एक समय के बाद ये समस्या खत्म हो जाएगी।  ऐसे में अगर आप किसी समस्या को लेकर चिंता करते हैं और अपने मन में नकारात्मक विचार लाते हैं, तो ये ध्यान रखें कि ये समय भी बीत जाएगा। इसलिए किसी भी समस्या को बढ़ा न बनाए। लम्बी गहरी सांस लें जब भी आपको नकारात्मक विचार आए, तो हमें गहरी सांस लेनी चाहिए। गहरी सांस लेकर सोचें कि आपको किससे क्या कहना है, किससे क्या बात करनी है।  वहीं, जब आप गहरी सांस लेते...

गधा और किसान : शैतान हमारे बीच सिर्फ गधा छोड़ता है बस!

 गधा पेड़ से बंधा था। शैतान आया और उसे खोल गया। गधा मस्त होकर खेतों की ओर भाग निकला और खड़ी फसल को खराब करने लगा। किसान की पत्नी ने यह देखा तो गुस्से में गधे को मार डाला। गधे की लाश देखकर गधे के मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने किसान की पत्नी को गोली मार दी।  किसान पत्नी की मौत से इतना गुस्से में आ गया कि उसने गधे के मालिक को गोली मार दी। गधे के मालिक की पत्नी ने जब पति की मौत की खबर सुनी तो गुस्से में बेटों को किसान का घर जलाने का आदेश दिया। बेटे शाम में गए और मां का आदेश खुशी-खुशी पूरा कर आए। उन्होंने मान लिया कि किसान भी घर के साथ जल गया होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान वापस आया और उसने गधे के मालिक की पत्नी और बेटों, तीनों की हत्या कर दी। इसके बाद उसे पछतावा हुआ और उसने शैतान से पूछा कि यह सब नहीं होना चाहिए था। ऐसा क्यों हुआ? शैतान ने कहा, 'मैंने कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ गधा खोला लेकिन तुम सबने रिऐक्ट किया, ओवर रिऐक्ट किया और अपने अंदर के शैतान को बाहर आने दिया। इसलिए अगली बार किसी का जवाब देने, प्रतिक्रिया देने, किसी से बदला लेने से पहले एक लम्हे के लिए रुकना ...

"राजनीति ही हमारा पेशा है।"

 एक बार वियतनाम के राष्ट्रपति  हो-ची-मिन्ह भारत आए थे।  भारतीय मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग में उन्होंने पूछा - " आपलोग क्या करते हैं ?" इनलोगों ने कहा - " हमलोग राजनीति करते हैं ।" वे समझ नहीं सके इस उत्तर को।  उन्होंने दुबारा पूछा- "मेरा मतलब, आपका पेशा क्या है?" इनलोगों ने कहा - "राजनीति ही हमारा पेशा है।" हो-ची मिन्ह तनिक झुंझलाए, बोला -  "शायद आपलोग मेरा मतलब नहीं समझ रहे।  राजनीति तो मैं भी करता हूँ ;  लेकिन पेशे से मैं किसान हूँ ,  खेती करता हूँ। खेती से मेरी आजीविका चलती है।  सुबह-शाम मैं अपने खेतों में काम करता हूँ।  दिन में राष्ट्रपति के रूप में देश के लिए  अपना दायित्व निभाता हूँ ।" भारतीय प्रतिनिधिमंडल निरुत्तर हो गया कोई जबाब नहीं था उनके पास। जब हो-ची-मिन्ह ने दुबारा वही वही बातें पूछी तो प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने झेंपते हुए कहा - "राजनीति करना ही हम सबों का पेशा है।" स्पष्ट है कि भारतीय नेताओं के पास इसका कोई उत्तर ही न था।  बाद में एक सर्वेक्षण से पता चला कि भारत में 6 लाख से अधिक लोगों की आजीविक...

एक पिता की कहानी, जिन्होंने मॉडल बेटी को बना दिया IAS

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 इंग्लिश की कहावत 'Behind every great daughter is a truly amazing father' यानी हर महान बेटी के पीछे वास्तव में एक अद्भुत पिता होता है।  कहा जाता है, बेटियां अपने पापा के ज्यादा करीब होती हैं, ऐसे में हर पिता इच्छा होती है कि उनकी बेटी पढ़- लिखकर भविष्य में आगे बढ़ें।   आज देश भर में 'डॉटर्स डे' मनाया जा रहा है, इस मौके पर हम आपको एक पिता के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी बेटी को IAS बनाने के लिए काफी संघर्ष किया।  आइए जानते हैं उनके बारे में/ इसी साल यूपीएससी 2019 का रिजल्ट अगस्त महीने में जारी किया गया, जिसमें पूर्व मिस इंडिया फाइनलिस्ट ऐश्वर्या श्योरान का नाम था। उन्होंने इस परीक्षा में 93वीं रैंक हासिल की थी।  ऐश्वर्या के लिए ये सफर आसान नहीं था, लेकिन इस जर्नी में उनके पिता कर्नल अजय कुमार ने पूरा साथ दिया। आजतक डॉट इन से खास बात करते हुए कर्नल अजय कुमार ने बताया, कैसे उन्होंने अपनी मॉडल बेटी की यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करवाई। वर्तमान में कर्नल अजय NCC तेलंगाना बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। अजय कुमार ने कहा, एक पिता की जान उ...

एक कटोरी दही

*एक कटोरी दही* जब एक शख्स लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। लोगों ने दूसरी शादी की सलाह दी परन्तु उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं, इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी। पुत्र जब वयस्क हुआ तो पूरा कारोबार पुत्र के हवाले कर दिया। स्वयं कभी अपने तो कभी दोस्तों के आॅफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे। पुत्र की शादी के बाद वह ओर अधिक निश्चित हो गये। पूरा घर बहू को सुपुर्द कर दिया। पुत्र की शादी के लगभग एक वर्ष बाद दोहपर में खाना खा रहे थे, पुत्र भी लंच करने ऑफिस से आ गया था और हाथ–मुँह धोकर खाना खाने की तैयारी कर रहा था। उसने सुना कि पिता जी ने बहू से खाने के साथ दही माँगा और बहू ने जवाब दिया कि आज घर में दही उपलब्ध नहीं है। खाना खाकर पिताजी ऑफिस चले गये। थोडी देर बाद पुत्र अपनी पत्नी के साथ खाना खाने बैठा। खाने में प्याला भरा हुआ दही भी था। पुत्र ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और खाना खाकर स्वयं भी ऑफिस चला गया। कुछ दिन बाद पुत्र ने अपने पिताजी से कहा- ‘‘पापा आज आपको कोर्ट चलना है, आज आपका...

क्रोध के दो मिनट

😡क्रोध के दो मिनट😡 एक युवक ने विवाह के दो साल  बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही । पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी  गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया । परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया । सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई और वापस घर लौटने की इच्छा हुई । पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी और जहाज में बैठ गया । उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी मन से बैठा था । सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि इस देश में ज्ञान  की कोई कद्र नही है । मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था  पर कोई लेने को तैयार नहीं है । सेठ ने सोचा 'इस देश में मैने बहुत धन कमाया है, और यह मेरी कर्मभूमि है, इसका मान रखना चाहिए !' उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई । उस व्यक्ति ने कहा- मेरे हर ज्ञान  सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है । सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था.. लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए 500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी । व्यक्ति ने ...

उबुन्टु ( *UBUNTU* ) - एक सुंदर कथा

*उबुन्टु* ( *UBUNTU* ) - एक सुंदर कथा : कुछ आफ्रिकन आदीवासी बच्चों को एक मनोविज्ञानी ने एक खेल खेलने को कहा। उसने एक टोकरी में मिठाइयाँ और कैंडीज एक वृक्ष के पास रख दिए। बच्चों को वृक्ष से 100 मीटर दूर खड़े कर दिया। फिर उसने कहा कि, जो बच्चा सबसे पहले पहुँचेगा उसे टोकरी के सारे स्वीट्स मिलेंगे। जैसे ही उसने, _रेड़ी स्टेडी गो_ कहा..... तो जानते हैं उन छोटे बच्चों ने क्या किया ? सभी ने एक दुसरे का हाँथ पकड़ा और एक साथ वृक्ष की ओर दौड़ गए. पास जाकर उन्होंने सारी मिठाइयाँ और कैंडीज आपस में बराबर बाँट लिए और मजे ले लेकर खाने लगे। जब मनोविज्ञानी ने पूछा कि, उन लोगों ने ऐंसा क्यों किया ?   तो उन्होंने कहा--- *"उबुन्टु ( Ubuntu ) "* जिसका मतलब है, " _कोई एक व्यक्ति कैसे खुश रह सकता है जब, बाकी दूसरे सभी दुखी हों_ ? " *उबुन्टु* ( *Ubuntu* ) का उनकी भाषा में मतलब है, *" मैं हूँ क्योंकि, हम हैं ! "* सभी पीढ़ियों के लिए एक सुन्दर सन्देश, आइए इस के साथ सब ओर जहाँ भी जाएँ, खुशियाँ बिखेरें, आइए _*उबुन्टु*_ ( _*Ubuntu*_ ) वाली जिंदगी जिएँ..... ...

प्याज और लहसुन ना खाए जाने के पीछे सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा

♨ प्याज लहसुन खाना शास्त्रोँ मेँ क्यों मना किया गया है? ♨ 🚫 -----------------–------------ -------- प्याज और लहसुन ना खाए जाने के पीछे सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा यह है कि समुद्रमंथन से निकले अमृत को, मोहिनी रूप धरे विष्णु भगवान जब देवताओं में बांट रहे थे; तभी एक राक्षस भी वहीं आकर बैठ गया। भगवान ने उसे भी देवता समझकर अमृत दे दिया। लेकिन तभी उन्हेँ सूर्य व चंद्रमा ने बताया कि ये राक्षस है। . भगवान विष्णु ने तुरंत उसके सिर धड़ से अलग कर दिए। लेकिन राहू के मुख में अमृत पहुंच चुका था इसलिए उसका मुख अमर हो गया। पर भगवान विष्णु द्वारा राहू के सिर काटे जाने पर उनके कटे सिर से अमृत की कुछ बूंदे ज़मीन पर गिर गईं जिनसे प्याज और लहसुन उपजे। . चूंकि यह दोनों सब्ज़िया अमृत की बूंदों से उपजी हैं इसलिए यह रोगों और रोगाणुओं को नष्ट करने में अमृत समान होती हैं पर क्योंकि यह राक्षसों के मुख से होकर गिरी हैं इसलिए इनमें तेज़ गंध है और ये अपवित्र हैं जिन्हें कभी भी भगवान के भोग में इस्तमाल नहीं किया जाता। . कहा जाता है कि जो भी प्याज और लहसुन खाता है उनका शरीर राक्ष...

जारी था एक खेल कहने-सुनने का

वह कहता था, वह सुनती थी, जारी था एक खेल कहने-सुनने का। खेल में थी दो पर्चियाँ। एक में लिखा था ‘कहो’, एक में लिखा था ‘सुनो’। अब यह नियति थी या महज़ संयोग? उसके हाथ लगती रही वही पर्ची जिस पर लिखा था ‘सुनो’। वह सुनती रही। उसने सुने आदेश। उसने सुने उपदेश। बन्दिशें उसके लिए थीं। उसके लिए थीं वर्जनाएँ। वह जानती थी, 'कहना-सुनना' नहीं हैं केवल क्रियाएं। राजा ने कहा, 'ज़हर पियो' वह मीरा हो गई। ऋषि ने कहा, 'पत्थर बनो' वह अहिल्या हो गई। प्रभु ने कहा, 'निकल जाओ' वह सीता हो गई। चिता से निकली चीख, किन्हीं कानों ने नहीं सुनी। वह सती हो गई। घुटती रही उसकी फरियाद, अटके रहे शब्द, सिले रहे होंठ, रुन्धा रहा गला। उसके हाथ कभी नहीं लगी वह पर्ची, जिस पर लिखा था, ‘ कहो ’। -Amrita Pritam Keywords : comments,share,story,jokes

कुदरत की सबसे प्यारी सोगात

बिटिया  थोड़ी बड़ी हो गयी,  एक रोज उसने बड़े सहज भाव में अपने पिता से पूछा -  "पापा, क्या मैंने आपको कभी रुलाया" ? पिता ने कहा -"हाँ " उसने बड़े आश्चर्य से पूछा - "कब" ? पिता ने बताया - 'उस समय तुम करीब एक साल की थीं, घुटनों पर सरकती थीं। मैंने तुम्हारे सामने पैसे, पेन और खिलौना रख दिये क्योंकि मैं ये देखना चाहता था कि,  तुम तीनों में से किसे उठाती हो  तुम्हारा चुनाव मुझे बताता कि, बड़ी होकर तुम किसे अधिक महत्व देतीं।  जैसे पैसे मतलब संपत्ति, पेन मतलब बुद्धि और खिलौना मतलब आनंद। मैंने ये सब बहुत सहजता से लेकिन उत्सुकतावश किया था क्योंकि मुझे सिर्फ तुम्हारा चुनाव देखना था। तुम एक जगह स्थिर बैठीं टुकुर टुकुर उन तीनों वस्तुओं को देख रहीं थीं। मैं तुम्हारे सामने उन वस्तुओं की दूसरी ओर खामोश बैठा बस तुम्हें ही देख रहा था। तुम घुटनों और हाथों के बल सरकती आगे बढ़ीं, मैं अपनी श्वांस रोके तुम्हें ही देख रहा था  और क्षण भर में ही तुमने तीनों वस्तुओं को आजू बाजू सरका दिया  और उन्हें पार करती हुई आकर सीधे मेरी गोद म...

रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान बन्द ही कर रहा था

रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान बन्द ही कर रहा था कि एक कुत्ता दुकान में आया .. , उसके मुॅंह में एक थैली थी, जिसमें सामान की लिस्ट और पैसे थे ... , दुकानदार ने पैसे लेकर सामान उस थैली में भर दिया ... , कुत्ते ने थैली मुॅंह मे उठा ली और चला गया ... , दुकानदार आश्चर्यचकित होके कुत्ते के पीछे पीछे गया ये देखने की इतने समझदार कुत्ते का मालिक कौन है .... , कुत्ता बस स्टाॅप पर खडा रहा, थोडी देर बाद एक बस आई जिसमें चढ गया .. , कंडक्टर के पास आते ही अपनी गर्दन आगे कर दी, उस के गले के बेल्ट में पैसे और उसका पता भी था .. , कंडक्टर ने पैसे लेकर टिकट कुत्ते के गले के बेल्ट मे रख दिया .. , अपना स्टाॅप आते ही कुत्ता आगे के दरवाजे पे चला गया और पूॅंछ हिलाकर कंडक्टर को इशारा कर दिया और बस के रुकते ही उतरकर चल दिया ... , दुकानदार भी पीछे पीछे चल रहा था ... , कुत्ते ने घर का दरवाजा अपने पैरोंसे २-३ बार खटखटाया ... , अन्दर से उसका मालिक आया और लाठी से उसकी पिटाई कर दी .. , दुकानदार ने मालिक से इसका कारण पूछा .. ?? , मालिक बोला .. "साले ने मेरी नींद खराब कर...

बहन के अपमान के लिये पूरा कुल दाव पर

आजकल सोशल मिडिया पर एक ट्रेंड बहुत तेजी से चल पड़ा है , रावण के बखान..!! वो एक प्रकांड पंडित था जी....उसने माता सीता को कभी छुआ नहीं जी....अपनी बहन के अपमान के लिये पूरा कुल दाव पर लगा दिया जी.....!!! अर्रे भाई...माता सीता को ना छूने का कारण उसकी भलमनसाहत नहीं बल्कि कुबेर के पुत्र “नलकुबेर” द्वारा दिया गया श्राप था..!!! कभी लोग ये कहानी सुनाने बैठ जाते हैं कि एक मां अपनी बेटी से ये पूछती है कि तुम्हें कैसा भाई चाहिये..बेटी का जवाब होता है..रावण जैसा... जो अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिये सर्वस्व न्योंछावर कर दे... भद्रजनो..ऐसा नहीं है.... रावण की बहन सूर्पणंखा के पति का नाम विधुतजिव्ह था..जो राजा कालकेय का सेनापति था..जब रावण तीनो लोको पर विजय प्राप्त करने निकला तो उसका युद्ध कालकेय से भी हुआ..जिसमे उसने विधुतजिव्ह का वध कर दिया...तब सूर्पणंखा ने अपने ही भाई को श्राप दिया कि, तेरे सर्वनाश का कारण मै बनूंगी..!! कोई कहता है कि रावण अजेय था... जी नहीं.. प्रभु श्री राम के अलावा उसे राजा बलि, वानरराज बाली , महिष्मति के राजा कार्तविर्य अर्जुन और स्वयं भगवान शिव ने भी हराया थ...

लडकी की सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है

इसे शांत चित्त से पढिए। हर लडकी के लिए प्रेरक कहानी... और लड़कों के लिए अनुकरणीय शिक्षा..., कोई भी लडकी की सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है। ... ... अशोक भाई ने घर मेँ पैर रखा....‘अरी सुनती हो !' आवाज सुनते ही अशोक भाई की पत्नी हाथ मेँ पानी का गिलास लेकर बाहर आयी और बोली "अपनी beti का रिश्ता आया है, अच्छा भला इज्जतदार सुखी परिवार है, लडके का नाम युवराज है । बैँक मे काम करता है। बस beti  हाँ कह दे तो सगाई कर देते है." Beti उनकी एकमात्र लडकी थी.. घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था । कभी कभार अशोक भाई सिगरेट व पान मसाले के कारण उनकी पत्नी और beti के साथ कहा सुनी हो जाती लेकिन अशोक भाई मजाक मेँ निकाल देते । Beti खूब समझदार और संस्कारी थी । S.S.C पास करके टयुशन, सिलाई काम करके पिता की मदद करने की कोशिश करती । अब तो beti ग्रज्येएट हो गई थी और नोकरी भी करती थी लेकिन अशोक भाई उसकी पगार मेँ से एक रुपया भी नही लेते थे... और रोज कहते ‘बेटी यह पगार तेरे पास रख तेरे भविष्य मेँ तेरे काम आयेगी ।' दोनो घरो की सहमति से beti  और युवराज क...

रावण का चमत्कार या राम का...पावर...??"

🍐 " रावण का चमत्कार या राम का...पावर...??" (जरूर पढेँ.. एक हास्य रस का सस्पेँश कथा) . . श्री राम के नाम से पत्थरो के तैरने की news जब लंका पहुँची , तब वहाँ की public में काफी gossip हुआ कि भैया जिसके नाम से ही पत्थर तैरने लगें, वो आदमी क्या गज़ब होगा। इस तरह की बेकार की अफ़वाहों से परेशान रावण ने तैश में आकरannounce करवा दिया कि कल रावण के नाम लिखे हुए पत्थर भी पानी में तिराये जायेंगे। और अगले दिन लंका में public holiday declare कर दिया गया। निश्चित दिन और समय पर सारी population रावण का चमत्कार देखने पहुँच गयी। Set time पर रावण अपने भाई - बँधुओं , पत्नियों तथा staff के साथ वहाँ पहुँचे और एक भारी से पत्थर पर उनका नाम लिखा गया। Labor लोगों ने पत्थर उठाया और उसे समुद्र में डाल दिया -- पत्थर सीधा पानी के भीतर ! सारी public इस सब को साँस रोके देख रहे थी जबकी रावण लगातार मन ही मन में मँत्रोच्चारण कर रहे थे। अचानक, पत्थर वापस surface पर आया और तैरने लगा। Public पागल हो गयी , और 'लँकेश की जय' के कानफोड़ू नारों ने आसमान को ...

खुदा की बंदगी

साधारण युवती सिखा गई अकबर को ‘खुदा की बंदगी’ एक बार बादशाह अकबर जंगल में घूमने के लिए निकलें। रास्ते में चलते-चलते नमाज का वक्त हुआ। बादशाह ने दरी बिछाकर नमाज पढना शुरु किया। इतने में एक युवती अपने पतिदेव को ढूंढती हुई उधर से निकली। उसका ध्यान दरी पर नहीं होने से वह उस पर पैर रखकर निकल गई। बादशाह ने देखा तो वे गुस्सा हो उठे। वे बोले-क्या तुम्हें यह दिखाई नहीं दिया की मैं नमाज पढ रहा हूं? मैं खुद की बंदगी में लीन था, यह देखते हुए भी तुम मेरी दरी पर पैर रखकर चली गईं। युवती ने यह बात सुनी, तो जवाब मे उसने एक दोहा पढा- “नर राची सूझी नहीं, तुम कस लख्यों सुजान। पढि कुरान बौरे भयो, नहीं राच्यौ रहमान॥” मैं तो अपने प्रियतम की खोज मैं मग्न थी, इसलिए मेरा ध्यान आपकी ओर नहीं गया, मगर आप तो भगवान की भक्ति में लीन थे, फिर भला आपने मुझे कैसे देख लिया। लग्ता है आपका ध्यान नमाज की ओर नहीं, मेरी ओर था जबकि मेरा ध्यान मेरे प्रिय में होने से आपकी तरफ नही था। युवती की बात सुनकर अकबर ने कहा-अब वह नमाज पढते समय अपना पूरा खयाल खुदा में रखेगा। Keywords ; comments,share,story,jokes

अच्छे दिनों मे अहंकार न करो

एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया। प्रेम भी इतना कि बादशाह रात को भी उसे अपने कमरे में सुलाता। कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही करते। एक दिन दोनों शिकार खेलने गए और रास्ता भटक गए। भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे। पेड़ पर एक ही फल लगा था। बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को अपने हाथ से तोड़ा। बादशाह ने फल के छह टुकड़े किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा फकीर को दिया। फकीर ने टुकड़ा खाया और बोला, 'बहुत स्वादिष्ट! ऎसा फल कभी नहीं खाया। एक टुकड़ा और दे दें। दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल गया।  फकीर ने एक टुकड़ा और बादशाह से मांग लिया। इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा लिए। जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो बादशाह ने कहा, 'यह सीमा से बाहर है। आखिर मैं भी तो भूखा हूं। मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं करते।' और सम्राट ने फल का टुकड़ा मुंह में रख लिया। मुंह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह कड़वा था। राजा बोला, 'तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए? ' उस...