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कभी स्कूल से निकाले गए थे Einstein! पढ़े सफलता और संघर्ष की कहानी

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 सफलता संघर्ष मांगती है।  संघर्ष और मेहनत करके ही इंसान आगे बढ़ता है।   अल्बर्ट आइंस्टीन की कहानी भी बिल्कुल ऐसी ही है। अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी मेहनत से अपने लिए ऐसा मुकाम बनाया कि वह सदी के सबसे महान वैज्ञानिक कहलाए।   एक समय ऐसा था कि आइंस्टीन को स्कूल से निकाल दिया गया था।   स्कूल से निकाले जाने के बाद आइंस्टीन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी मेहनत से दुनिया के महान वैज्ञानिक बन गए। अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म जर्मनी के वुर्टेमबर्ग शहर के उल्म में 14 मार्च, 1879 को हुआ था। छह हफ्ते बाद परिवार म्यूनिख चला गया, जहां बाद में उन्होंने ल्यूपॉल्ड जिमनैजियम में स्कूली शिक्षा शुरू की।   बाद में, वे इटली चले गए और अल्बर्ट ने स्विट्जरलैंड के एरौ में अपनी शिक्षा जारी रखी और 1896 में उन्होंने ज्यूरिख में स्विस फेडरल पॉलिटेक्निक स्कूल में प्रवेश किया, जिसे भौतिकी और गणित में शिक्षक के रूप में प्रशिक्षित किया गया।   1901 में, जिस वर्ष उन्होंने अपना डिप्लोमा प्राप्त किया, उन्होंने स्विस नागरिकता हासिल कर ली और चूंकि वे एक शिक्षण पद नहीं पा सक...

चिढ़ो मत--गुस्सा मत करो!

 कोई भी कारण हो!  कोई भी बात हो चिढ़ो मत--गुस्सा मत करो!  जोर से मत बोलो!  मन शान्त रखो विचार करो!  फिर निर्णय लो, आवाज से आवाज नहीं मिटती बल्कि चुप्पी से मिटती है।  तकलीफ सिर्फ आपको होगी, दुःख भी आपको ही होगा! मन शान्त रखोगे तो, सुख भी आपको ही मिलेगा!

ऐ हुस्न की मलिका पांच रुपये दे दे...

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 जिस तरह अच्छी हवा, अच्छा खानपान किसी भी इंसान के सेहतमंद रहने के लिए जरूरी होता है, उसी प्रकार आपकी हंसी भी आपको स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती है।  अगर आप सुबह-शाम हंसने की आदत डाल लें तो कोई भी बीमारी, चाहे मानसिक हो या शारीरिक आपके पास भी नहीं आएगी।  इसीलिए हम आपके लिए कुछ ऐसे मजेदार चुटकुले लेकर आए हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे। तो चलिए शुरू करते हैं हंसने-हंसाने का ये सिलसिला। रिश्तेदार कहते जरूर हैं कि... . खुश रहो... . पर... . मजाल है कि खुश रहने दें...!!! ................. पति और पत्नी दुकान से निकले तो  एक फकीर ने कहा- ऐ हुस्न की मलिका पांच रुपये दे दे...  . पति ने पत्नी की तरफ देखा और बोला-  दे दे... वाकई अंधा है...!!!  ........ पति (रोमांटिक मूड में) - तुझमें रब दिखता है,  यारा मैं क्या करूं?  . पत्नी - करना क्या है, हर रोज माथा टेक के  2000 का नोट चढ़ा दिया करो...!!! ......          ......       .......      ......

बाजार में पप्पू को एक बेहद खूबसूरत महिला दिखी...

 जिस तरह अच्छी हवा, अच्छा खानपान किसी भी इंसान के सेहतमंद रहने के लिए जरूरी होता है, उसी प्रकार आपकी हंसी भी आपको स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती है।  अगर आप सुबह-शाम हंसने की आदत डाल लें तो कोई भी बीमारी, चाहे मानसिक हो या शारीरिक आपके पास भी नहीं आएगी।  इसीलिए हम आपके लिए कुछ ऐसे मजेदार चुटकुले लेकर आए हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे।  तो चलिए शुरू करते हैं हंसने-हंसाने का ये सिलसिला... ------------------------------------------ 1. बाजार में पप्पू को एक बेहद खूबसूरत महिला दिखी... पप्पू खड़ा होकर उसे देखता ही रह गया... तभी वो उसके आई और बोली - भाई साहब,  दिख तो मैं आंख से भी जाऊंगी, मुंह तो बंद कर लो...!!! 2. एक महिला ने एंबुलेंस बुलाने के लिए कॉल किया... ऑपरेटर - आपको क्या समस्या है?  महिला - मेरे पैर की ऊंगली कॉफी टेबल से टकरा गई... ऑपरेटर (हंसते हुए) - तो इसके लिए आप एंबुलेंस बुलाना चाहती हैं?  महिला - नहीं, एंबुलेंस तो मेरे पति के लिए है, उन्हें हंसना नहीं चाहिए था...!!! 3. चेन स्नैचिंग वाले महिला के गले से...

गधा और किसान : शैतान हमारे बीच सिर्फ गधा छोड़ता है बस!

 गधा पेड़ से बंधा था। शैतान आया और उसे खोल गया। गधा मस्त होकर खेतों की ओर भाग निकला और खड़ी फसल को खराब करने लगा। किसान की पत्नी ने यह देखा तो गुस्से में गधे को मार डाला। गधे की लाश देखकर गधे के मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने किसान की पत्नी को गोली मार दी।  किसान पत्नी की मौत से इतना गुस्से में आ गया कि उसने गधे के मालिक को गोली मार दी। गधे के मालिक की पत्नी ने जब पति की मौत की खबर सुनी तो गुस्से में बेटों को किसान का घर जलाने का आदेश दिया। बेटे शाम में गए और मां का आदेश खुशी-खुशी पूरा कर आए। उन्होंने मान लिया कि किसान भी घर के साथ जल गया होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान वापस आया और उसने गधे के मालिक की पत्नी और बेटों, तीनों की हत्या कर दी। इसके बाद उसे पछतावा हुआ और उसने शैतान से पूछा कि यह सब नहीं होना चाहिए था। ऐसा क्यों हुआ? शैतान ने कहा, 'मैंने कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ गधा खोला लेकिन तुम सबने रिऐक्ट किया, ओवर रिऐक्ट किया और अपने अंदर के शैतान को बाहर आने दिया। इसलिए अगली बार किसी का जवाब देने, प्रतिक्रिया देने, किसी से बदला लेने से पहले एक लम्हे के लिए रुकना ...

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के लाल

 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के लाल जमीन से जुड़े नेता  सादगी और सिंद्धान्तों की मिसाल लालबहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं।  गांधी एक दर्शन थे एक संभ्यता थे एक संस्कृति थे जी हमको जीना सीखा गए। उनके विचार उनके सिद्धान्त उनकी सादगी पूर्ण जीवन शैली नजीर है और अनुकरणीय है। उनका  सत्य  और अहिंसा का प्रयोग लोकतंत्र की नींव को वह मजबूती दे गया जिस पर लोकतंत्र आज टिका है।  गांधी मर कर भी अमर हो गए आज भी हमारे दिलों में जिंदा है जबकि कायर नपुंसक भीरु हत्यारा गोडसे जीवन पर्यन्त घृणा का पात्र बना रहेगा। महात्मा गांधी अमर रहे  उनकी कीर्ति युगों युगों तक अक्षय रहे। इतिहास की रेडिमेड समझ रखने वालों को लगता है कि गांधी की वजह से भारत का विभाजन हुआ! यह बात आपकी समझ से बाहर है कि कई पैमानों पर पहले से टुकड़ों-टुकड़ों में बंटा भारत, गांधी के जीवन काल तक गांधी के ही सरल लेकिन विराट व्यक्तित्व की छाया में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक एक अदृश्य धागे में बंधा हुआ था! गांधी से जिनको विरोध है वो यह क्यों नहीं बताते कि किस कर...

"राजनीति ही हमारा पेशा है।"

 एक बार वियतनाम के राष्ट्रपति  हो-ची-मिन्ह भारत आए थे।  भारतीय मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग में उन्होंने पूछा - " आपलोग क्या करते हैं ?" इनलोगों ने कहा - " हमलोग राजनीति करते हैं ।" वे समझ नहीं सके इस उत्तर को।  उन्होंने दुबारा पूछा- "मेरा मतलब, आपका पेशा क्या है?" इनलोगों ने कहा - "राजनीति ही हमारा पेशा है।" हो-ची मिन्ह तनिक झुंझलाए, बोला -  "शायद आपलोग मेरा मतलब नहीं समझ रहे।  राजनीति तो मैं भी करता हूँ ;  लेकिन पेशे से मैं किसान हूँ ,  खेती करता हूँ। खेती से मेरी आजीविका चलती है।  सुबह-शाम मैं अपने खेतों में काम करता हूँ।  दिन में राष्ट्रपति के रूप में देश के लिए  अपना दायित्व निभाता हूँ ।" भारतीय प्रतिनिधिमंडल निरुत्तर हो गया कोई जबाब नहीं था उनके पास। जब हो-ची-मिन्ह ने दुबारा वही वही बातें पूछी तो प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने झेंपते हुए कहा - "राजनीति करना ही हम सबों का पेशा है।" स्पष्ट है कि भारतीय नेताओं के पास इसका कोई उत्तर ही न था।  बाद में एक सर्वेक्षण से पता चला कि भारत में 6 लाख से अधिक लोगों की आजीविक...